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आनलाईन दर्शन
 
श्री मांडू सिद्ध मन्दिर
 
सर्व विदित है कि त्रेता युग में ऋषि दत्तात्रेय जी हुए थे। इनमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों महादेवों की शक्तियाँ विद्यमान थी। इनके 84 शिष्य हुए जिन्होंने पूर्व काल में उत्तर भारत में ही विभिन्न स्थानों पर भगवान शिव की तपस्या करके सिद्धियाँ प्राप्त करते हुए शरीर त्यागा था, वहाँ आज भी उकने नाम के सिद्ध पीठ हैं।

देहरादून के चार एकान्त स्थानों पर चारों दिशाओं में चार सिद्ध पीठ स्थान हैं। देहरादून के पूरब में कालू सिद्ध, दक्षिण में लक्ष्मण सिद्ध, पश्चिम में मानक सिद्ध तथा उत्तर में मांडू सिद्ध जी की सिद्ध पीठ है। इन सभी सिद्ध पीठ स्थानों पर भक्तजन अपनी मन्नतें मांगते हैं। मन्नतें पूरी हो जाने पर भक्तजन अपनी श्रद्धा के अनुसार अपनी मनौती चढ़ाते हैं या भण्डारा करते हैं।

देहरादून से विकासनगर मुख्य मार्ग से 15 कि.मी. अन्दर कई गांवों को जोड़ती मुख्य सड़क से आमवाला गांव पहुँचा जाता है। यहाँ से लगभग 1.5 कि.मी. पैदल मार्ग पर घने जंगल व नदी के किनारे नैसर्गिक सुन्दरता में स्थित है मांडू सिद्ध मन्दिर। एक ओर घने जंगल का ढालदार स्वरूप तो दूसरी ओर नदी का विस्तार इस स्थान को सुरम्यता प्रदान करता है। यहाँ मांडू सिद्ध में प्रत्येक वर्ष बसन्त पंचमी के दिन मेले एवं माह जून के दूसरे रविवार को भण्डारे का आयोजन होता है। इन अवसरों पर दूरदूर से आये भक्तजन भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं और पुण्य के भागीदार बनते हैं।

इस स्थान पर मुख्य मंदिर के साथ ही दो कुण्डी वाला स्थान भी है जिसके सम्बन्ध में कहा जाता है कि प्राचीन काल से ही उन पर दुग्ध चढ़ाने की परम्परा है। यह दोनों कुण्ड कई लीटर दूध चढ़ाने के पश्चात् भी भरते नहीं हैं। साथ ही प्राचीन काल से प्रज्ज्वलित अखण्ड धुनी भी यहाँ स्थित है। मन्दिर से आगे घोर जंगल में एक गुफा भी स्थित है जहाँ माना जाता है कि मांडू सिद्ध महाराज ने यहाँ घोर तपस्या की थी।
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