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आनलाईन दर्शन
 
माणिकसिद्ध (मनोकामना की पूर्णसिद्धि स्थल)
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सत्रहवीं शताब्दी में भगवत् प्रेम से अभिभूत होकर बाबा मानक सिद्ध ने देहरादून से 16 कि.मी. दूर पश्चिम उत्तर दिशा में शिमला बाईपास रोड़ पर आम के घने जंगल के मध्य आम सूत स्थान पर भगवान शिव व लक्ष्मी नारायण की आराधना की। अखण्ड तपतपस्या के पश्चात् भगवान शिव ने बाबा मानक को, सिद्ध बनाकर क्षेत्र की संस्कृति व धर्म जागरण के आधार पर रक्षा करने को कहा। बाबा मानक सिद्ध ने यहीं पर अपने कार्य व प्रभाव से लोगों का कष्ट समाप्त करने लगे।
 
बाबा मानक सिद्ध के विषय में श्रद्धालुओं की मान्यता है कि बाबा मानक सिद्ध आज भी अपने भक्तों को शिवरूप में दर्शन देकर उनके कष्टों को समाप्त करते हैं। अटूट आस्था का प्रतीक यह मन्दिर देश भर में विख्यात है। बाबा मानक सिद्ध की मुख्य पूजा रविवार के दिन भेली (गुड़) से की जाती है। क्षेत्र के लोग व श्रद्धालु अपने धनधान्य की सफलता व वृद्धि के लिए बाबा मानक सिद्ध में अनाज व दूध चढ़ाने आते हैं। ऐसा माना जाता है आम सूत के घने जंगल में सच्चे मन से दर्शन के लिये आने वाले व्यक्ति को सौभाग्यवश मिर्च के पौधे भी दिखाई पड़ जाते हैं।

बाबा मानक सिद्ध के वर्तमान स्वरूप को नया आयाम देने के लिए एक समिति का निर्माण ब्रलीन श्री स्वामी रामचरण दास जी महाराज के दिशा निर्देशन में बनी थी। जो आज भी इस मन्दिर की भव्यता को बढ़ाने का कार्य कर रही है। इसी स्थान पर श्री नरसिंह भगवान व श्री हनुमान जी का मन्दिर भी स्थित है। वर्तमान में इस मन्दिर के महन्त श्री आनन्द ब्रचारी जी इस मन्दिर की पूजा अर्चना कर बाबा मानक सिद्ध के पवित्र विचारों व कृतत्व को प्रचारित कर रहे हैं। यह मन्दिर सामाजिक चेतना व सामाजिक समरसता का भी अच्छा केन्द्र है। यह पवित्र मन्दिर यह सन्देश देता है कि मन का विश्वास व हृदय की आस्था व्यक्ति के हर कष्ट हर लेती है।
 
 
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